Janta ka Faisla: The Chhattisgarh Verdict

After 4 days of intense deliberations, the Janta ka Faisla jury read out their verdict. Both the Hindi text of the verdict (what was read out) and the English translation are given below.

After 4 days of intense deliberations, the Janta ka Faisla jury read out their verdict. Both the Hindi text of the verdict (what was read out) and the English translation are given below. We are also attaching links to an extended verdict with detailed recommendations that was agreed upon by the jurors at the end of this article.

हम प्रवासी क्यूँ है?

हम, 17 प्रवासी श्रमिक, छत्तीसगढ़ के हमारे साथी भाइयों और बहनों के प्रतिनिधियों ने चौपाल, नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया और सोक्रेटस द्वारा आयोजित जनता का फैसला में जूरी सदस्यों के रूप में बुलाया। हमने सरकार, नागरिक समाज और व्यवसाय के विभिन्न विशेषज्ञों के दलील सुने। हमने विभिन्न कानूनों, योजनाओं, अधिकारों और संभावनाओं के बारे में सीखा जो हमें लाभान्वित कर सकती हैं। हमने जो सुना उसके बारे में हमने गहराई से और सामूहिक रूप से विचार-विमर्श किया और ‘जूरी के दोस्तों’ की मदद से स्थिति को समझने की कोशिश की।

प्रवासी दो तरह के होते है एक जो स्वेच्छा से पलायन करते है एवं दूसरे जो दुर्गति के कारण पलायन करते है। हम सभी लोग छत्तीसगढ़ मे ही रहना चाहते है और पलायन नहीं करना चाहते हैं। दुर्गति पलायन को रोकने के लिए सरकार को छत्तीसगढ़ मे रोजगार बढ़ाना चाहिए एवं राज्य के प्राकृतिक संसाधनों – जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों को अधिकार देना चाहिए इसके साथ ही सभी को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।

इसी के आधार पर हम भारत के सभी मजदूर साथियों की ओर से खुद को यह फैसला सुनाते हैं। फैसले के अहम बिंदु इस प्रकार हैं –

  1. राज्य के प्राकृतिक संसाधनों – जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों को अधिकार होना चाहिए।
  2. सामुदायिक वानाधिकार सभी गाँव को मिलना चाहिए।
  3. मनरेगा के तहत सभी को 150 से बढ़ाकर 200 दिन का रोजगार मिलना चाहिए ताकि पलायन कम हो।
  4. वन उपज में और तेंदू, बांस, महुआ जैसे उद्योगों का प्रोत्साहन करना चाहिए और हमें उसमे शामिल करना चाहिए ताकि हमें काम करने के लिए बाहर न जाना पड़े।
  5. भूमिहीन प्रवासी मजदूरों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना को कार्यान्वित किया जाना चाहिए।

जो श्रमिक दुर्गति के कारण पलायन कर रहे हैं, उनको ध्यान मे रखकर :

  1. मृत्यु मुआवजा: हम सभी प्रवासी मजदूरों की जीवन बीमा की होनी चाहिए।
  2. संगठन: हमने महसूस किया है कि मजदूरों को सामूहिक रूप से काम करने की जरूरत है जिसके लिए हमे संगठित होना है। प्रवासी मजदूर के संगठन को सरकार से मान्यता मिलनी चाहिए और संगठन की आवाज को सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए।
  3. अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम का कार्यान्वयन होना चाहिए जहां श्रमिकों के लिए पंजीकरण है, और ठेकेदारों और एजेंटों के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है।
  4. प्राथमिक नियोक्ता को न्यूनतम मजदूरी के अलावा, हमे मिलने वाले सभी सुविधाओं एवं लाभों को मुहैया कराने के लिए जिम्मेदारी और जवाबदेही होनी चाहिए।
  5. कार्य स्थल पर नि:शुल्क आवास की व्यवस्था नियोक्ता द्वारा की जानी चाहिए। महिला प्रवासी श्रमिकों के लिए गंतव्य (कार्यस्थल) राज्यों में कामकाजी महिला हॉस्टल स्थापित किए जाने चाहिए। बच्चों के लिए क्रेच/झूलाघर नियोक्ता द्वारा स्थापित किया जाना चाहिए।
  6. आंगनवाड़ी में पंजीकरण की पोर्टेबिलिटी होनी चाहिए। जिसमे आंगनवाड़ी की व्यवस्था, मातृत्व लाभ, स्वास्थ्य बीमा लाभ मिलनी चाहिए।
  7. कोई भी बच्चे जो स्कूल जाने की उम्र के हैं, उनको हॉस्टल में दखिला करने की व्यवस्था हो ताकी उनकी पढाई जारी रहे और हमें कहीं भटकना न पड़े जिससे आगे जाकर बच्चे हमारे जैसे मजदूर ना बने। बच्चे यदि हमारे साथ गंतव्य राज्य पर जा रहे हो तो वहाँ मातृभाषा में पढाई की व्यवस्था होनी चाहिए।
  8. जब हम पलायन कर जाते हैं तो मनरेगा जॉब कार्ड निष्क्रिय हो जाते हैं। हमारा नाम का जॉब कार्ड निष्क्रिय नहीं होना चाहिए।
  9. हमें एक केंद्रीकृत हेल्पलाइन नंबर चाहिए।
  10. हमारे मतदान के अधिकार के संवैधानिक अधिकारों के लिए मालिक को हमे छुट्टी देने का अनिवार्य प्रावधान होना चाहिए। सरकार को सारे प्रवासी मजदूरों के लिए पोस्टल बैलेट प्रबंध करने के लिए चिंतन करना चाहिए।

भारत के नागरिक होने के नाते हमें चाहिए गरिमा, सम्मान, समानुभूति और अधिकार।

1. Everyone should have rights over the state’s natural resources – water, forest, and land.

2. Villages should be given rights over community forests.

3. Under MNREGA, everyone should get employment from 150 to 200 days, so that migration will be reduced.

4. In forest produce, tendu, bamboo, and mahua should be encouraged for industrial-level production.

5. Pradhan Mantri Awas Yojana for landless migrant laborers should be implemented.

Keeping in mind the workers who are migrating due to distress:

6. Death Compensation: All migrant laborers should have life insurance.

7. Union: The jury realized that workers need to work collectively, for which they have to organize themselves and create a strong union. This union of migrant laborers should get recognition from the government, and the government should take the union’s voice seriously.

8. Interstate Migrant Workers Act to be implemented strictly. Contractors and agents should be made to abide the law and registration for workers and licenses for contractors and agents should be made mandatory.

9.The primary employer should be held responsible and accountable for providing all the facilities and benefits, in addition to the minimum wage.

10. Free accommodation at the workplace should be arranged by the employer. Working women hostels should be set up in the destination states for women migrant workers. The employer should set up creches/ playhouse for children.

11. There should be the portability in Anganwadi registration, by which arrangements for Anganwadi, maternity benefits, health insurance benefits should be available.

12. Children of migrant labourers, who are of school-going age, should be provided hostel facility so that they can continue their studies, so that they to wander everywhere, or become labourers too in the future. Moreover, if children are to go with their parents to the destination state, there should be a system of education in the mother tongue.

13. MGNREGA job cards become inactive when the labourers migrate. Therefore, provisions must made to keep their job cards active.

14. There is need a centralized helpline number.

15. In order to ensure the constitutional voting rights of migrant labourers, mandatory provision should be made that the employer to grant them leave. In addition, the government should think of making postal ballot arrangements for all the migrant labourers.

Links

  1. Detailed verdict in Hindi
  2. Detailed verdict in English

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